संपादकीय। प्लेटो का यह कथन आज के दौर की भारतीय राजनीतिक सत्ता पर पूरी तरह से खरा उतरता है - विद्रोह वही करता है जो जिंदा होता है मरे हुए लोग सिर्फ आज्ञा मानते हैं। 1962 में हुए भारत चीन युद्ध की पीढ़ी अभी जिंदा जिन्होंने अपने प्राइमरी एज्युकेशन के दौरान हिन्दी की बालभारती में से "हिन्दी - चीनी भाई - भाई" के पाठ को फाड़ कर आग के हवाले किया था, अरुणाचल प्रदेश पर चीन का दावा ठोकना, लद्दाख की जमीन पर चीन का कब्जा करना, डोकलाम के भीतर चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों को शहीद करने की तारीख, आपरेशन सिंदूर के वक्त चीन का खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़ा होना सब कुछ तो तरोताजा है देशवासियों के जहन में लेकिन बदकिस्मती से इन सब घटनाक्रमों को मौजूदा सरकार और राष्ट्रवाद की छद्म खाल ओढ़ कर भारतियों की आंखों में धूल झोंक रही भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भूल चुके हैं। इसकी पुष्टि खुद बीजेपी और आरएसएस की कथनी-करनी से होती है। जिस वक्त भारत की राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांच सितारा आफिस में चाइना से आये हुए प्रतिनिधि मंडल का भव्य स्वागत किया जा रहा था तकरीबन उसी समय चीन की राजधानी बीजिंग के भीतर कश्मीर के एक हिस्से शक्सगाम को अपना बताया जा रहा था तथा कीड़े मकोड़े की तरह पैरों तले रेंग रहा मीडिया चिल्ल-पों कर रहा था "पिघल गया, पिघल गया - बरसों से जमा बर्फ पिघल गया और भारत का प्रधान बहुरूपिया बना डमरू बजा रहा था, बजरंगबली की पतंग बनाकर हवा में उड़ाते हुए पेंच लड़ा रहा था। दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐलान कर रहे थे कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा उस पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जायेगा। Donald J Trump : Effective immediately, any country doing business with the Islamic Republic of Iran will pay a tariff of 25% on any and all business being done with the United States of America. This order is final and conclusive. Thank you for your attention to this matter ! President Donald J Trump. ट्रंप के इस ऐलान से भारत भी प्रभावित होगा क्योंकि वह ईरान से व्यापार करता है। भारत वैसे भी पहले से ही विश्व गुरु के यार ट्रंप द्वारा ठोके गये 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ की मार झेल रहा है जो रशिया से तेल खरीदने के कारण लगाया गया है।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह तथा बीजेपी के विदेश मामलो के प्रभारी डाॅ विजय चौथाईवाले ने एक्स पर ट्यूट करते जो लिखा Ms Sun Hsiyan vice minister, International Dept of Communist Party of China (IDCPC) visited to day BJP head office during the meeting we discussed how to enhance communication and interaction between BJP and CPC. (Arun Singh) Dr. Vijay Chauthaiwale - A delegation of Communist Party of China under the leadership of H. E. Ms. Sun Haiyan (Vice Minister, IDCPC) visited BJP head office today. During the discussion, a BJP delegation headed by Party Gen. Sec. Shri Arun Singh Ji discussed at length the means to advance inter party communication between BJP and CPC. Chinese Ambassador to India N. E. Xu Feihong also joined the delegation. अडानी के मालिकाना हक के टीवी न्यूज चैनल एनडीटीवी ने खबरिया हेडलाइन लगाई "क्यों दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी BJP के मुख्यालय आया चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का प्रतिनिधि मंडल ? कल्पना की जाय कि अगर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का यही प्रतिनिधि मंडल दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय में श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात कर रहा होता तो क्या होता ? जाहिर है बीजेपी द्वारा कांग्रेस और उसके नेतृत्व को देशद्रोही घोषित किया जा रहा होता। उसके तमाम नेताओं की अमर्यादित शब्दावली के व्यक्तव्य अपनी छाती पीट रहे गोदी चैनलों के जरिए घर - घर गूंज रहे होते। यही तो कहा जा रहा होता जब भारत और चीन के बीच तनातनी है, चीन भारत के दुश्मन देश पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ साजिशें रचता है और उस चीन से कांग्रेस मिल रही है। लेकिन जब सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के पांच सितारा हेड आफिस में बिछाये गये रेड कारपेट पर चहल कदमी करते हुए चीन का डेलीगेशन मिलता है तो कहा जा रहा है कि यह मिलन आपसी रिश्ते बढ़ाने की कवायद है। गजब का दोगलापना है।
9 जनवरी 2026 को चीन पर मोदी मेहरबान ? कांग्रेस का बड़ा आरोप - शीर्षक से एक पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर की गई थी जिस पर डिटेल से लिखा था - मोदी जी चीनी कंपनियों पर लगे उस वैन को हटाने जा रहे हैं जिसके तहत वह सरकारी कांट्रेक्ट में भाग नहीं ले सकती थी। अब धड़ल्ले से सरकारी ठेके लेगी। अभी 8 महीने तो हुए हैं जब चीन ने आपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का पूरा साथ दिया था। जो पहलगाम में हमारे 26 लोगों की शहादत के खिलाफ कार्रवाई थी। चीन के सहयोग के चलते आपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सैनिक और नागरिक जिसमें छोटे बच्चे शामिल थे उनकी दर्दनाक मौत हुई। इसी चीन के चलते गलवान में हमारे 20 जांबाज शहीद हुए थे। इसी चीन को मोदी जी ने "कोई घुसा हुआ नहीं है" कहकर क्लीन चिट दी। इसी चीन से मोदी जी ने रिकॉर्ड तोड़ बिजनेस किया। व्यापार घाटा बढवाया। इसी चीन को मोदी जी ने इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में घुसपैठ करने की छूट दी। उनके लोगों को दोनों हाथों वीज़ा दिया। यही मोदी जी दावे करते थे चीन को लाल आंख दिखाने का लेकिन चीन का नाम तो ले नहीं पाते हैं और अब सरकारी कांट्रेक्ट, ठेकों में चीनी घुसपैठ का रास्ता साफ कर रहे हैं। यह है नरेन्द्र मोदी की असलियत। अमेरिका के सामने मिमियायेंगे, चीन के सामने गिडगिडायेंगे और अपने आप को विश्व गुरु कहलवायेंगे।
कांग्रेस की नेता सुप्रिया श्रीनेत ने बीजेपी और चीनी प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात की वो फोटोज जिन्हें बीजेपी के हेड आफिस से ही वायरल किया गया है, लिख रही हैं कि ये फोटो बीजेपी दफ्तर की है। बीजेपी के नेता और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के बीच मीटिंग हो रही है। आपरेशन सिंदूर में चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया, गलवान में हमारे जांबाजों की शहादत हुई, चीन लद्दाख में कब्जा किये बैठा है, अरुणाचल में गांव बसा रहा है और यहां गलबहियाँ चल रही है। मीडिया के चरण चुम्बकों आज नहीं पूछोगे यह रिश्ता क्या कहलाता है ? बीजेपी ने क्यों किया देशद्रोह ? बीजेपी चीन में कौन सा गुप्त समझौता हुआ ? मोदी सरकार की विदेश नीति वेंटिलेटर पर है। मोदी की लाल आंख का क्या हुआ ? दिव्या महपाल मदरेना ने लिखा है लाल आंखों का इतना प्रचार था कि लगा ये सरहद पार तक दिखेंगी लेकिन हकीकत यह है कि चीन हमारी जमीन पर निर्माण को जायज ठहरा रहा है। शक्सगाम घाटी में खुलेआम काम करता रहा और मोदी सरकार आंखें मूंदे बैठी रही। इतनी खामोशी सवाल खड़ा करती है। क्या यह मजबूरी है ? या फिर मंजूरी ? सीनियर जर्नलिस्ट सुशांत सिंह ने लिखा - अप्रैल 2020 मतलब गलवान वैली में जो चीनी अतिक्रमण या चीनी हिंसा हुई या चीनी हमला हुआ जिसकी वजह से हमारे जवानों की शहादत हुई है उस समय से पहले जो स्थिति थी लद्दाख के ईलाके में वो आज भी बहाल नहीं हुई है और क्राइम तभी होता है या अपराध तब है जब यह अपोजीशन लीडर से चीनी मिलते हैं। 2019 में अरुणाचल प्रदेश से आने वाले भाजपाई सांसद तापिन गांव ने पार्लियामेंट में जानकारी देते हुए अपनी ही सरकार के प्रधानमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 50-60 किलोमीटर अंदर तक घुसकर कब्जा कर लिया है। आसंदी को संबोधित करते हुए अपनी ही सरकार से कह रहा हूं दूसरा कहीं डगलाम होगा तो अरुणाचल प्रदेश में होगा वो दिन मत आने दीजिए। गवर्नमेंट आफ इंडिया हमारा सरकार इस चीज को ध्यान दिया जाए यह मैं आग्रह करता हूं।
जम्मू कश्मीर की शक्सगाम घाटी भारत के मुकुट का मणि है। यह उत्तर में चीन के शिंजियांग प्रांत और दक्षिण-पश्चिम में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से जुड़ा है। इसका इलाका 5400 किलोमीटर तक फैला हुआ है जिसे थोड़ा नहीं कहा जा सकता है। पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा मनोरम दृश्यों से भरपूर नैसर्गिक खूबसूरती से निखरे हुए इस इलाके को 1960 में पाकिस्तान ने चीन के साथ बाॅर्डर एग्रीमेंट करके चीन को सौंप दिया था । लेकिन भारत इसे आज भी अवैध मानता है। आज भी भारत का आधिकारिक स्टेंड है कि शक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। लेकिन चाइना इस इलाके में डंके की चोट पर पाकिस्तान इकोनॉमिक कारीडोर बना रहा है। भारत सी-पैक को मान्यता नहीं देता है। इसके बावजूद चीन ने इस इलाके में 10 किलोमीटर चौड़ी और 75 किलोमीटर लंबी सड़क बना ली है। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी पहले ही इस इलाके में 36 किलोमीटर सड़क बना चुकी है। सेटेलाईट की तस्वीरें कहती हैं कि इस शक्सगाम वैली के बाहर चीन के दो आर्मी पोस्ट जुड़ते हैं। इनमें एक पोस्ट तो इस इलाके की आर्मी का हेडक्वार्टर है। सीमा मुद्दों और चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि जिस इलाके का जिक्र भारत कर रहा है (जम्मू-कश्मीर में शक्सगाम वैली) वह चीन का है इस इलाके को हमने पाकिस्तान से 1960 में.... । यानी चीन ने भारत के दावे को एक झटके में खारिज कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम वैली पर चीनी कब्जेदारी का झंड़ा लहरा रहा है और दिल्ली में भाजपा और आरएसएस के पांच सितारा आफिस में चीनी डेलीगेशन के बीच गलबहियाँ चल रही है। तो क्या यह माना जाए कि भाजपा-चाइना भाई-भाई की तस्वीरों का कूटनीति मतलब यही है कि भारत और चीन के रिश्तों की दिशा अब भारत सरकार का विदेश मंत्रालय तय नहीं कर रहा है, अब उन्हें देश की वह राजनीतिक पार्टी अपने आफिस से तय कर रही है जिसे बहुमत तक हासिल नहीं है ? सवाल यह भी है कि भारत सरकार से कौन पूछेगा कि गैर पंजीकृत संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता किस हैसियत से चीन के डेलीगेशन के साथ मुलाकात कर रहे हैं ? भारत और चीन के बीच ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा 109 बिलियन डॉलर का हो चला है। सरल भाषा में कहें तो चीन भारत के मुकाबले ज्यादा कमा रहा है। तो सवाल यह है कि चीन जो भारत से कमाई कर रहा है क्या वह कश्मीर, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश के इलाकों पर कब्जा करने के लिए कमा रहा है ? वैसे भी हकीकत तो यही है कि भारत सुई से लेकर मोबाईल, कार से लेकर केमिकल, प्लास्टिक से लेकर टर्बाइन तक चीन से मंगा रहा है। मोदी गवर्नमेंट का मेक इन इंडिया चीन के कच्चे माल पर पूरी तरह से निर्भर है। चीन भारत के बाजार में अपना माल खपा करके रुपया भी कमा रहा है और भारत के ईलाके भी खा रहा है। यानी मोदी सरकार और मोदी पार्टी भारत का रुपया, भारत की इज्जत, भारत का स्वाभिमान सब कुछ चीन पर न्यौछावर करती चली जा रही है। जिन बातों से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नींद उचट जानी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं है वे तो त्रिपुंड लगाकर डमरू बजा रहे हैं। एक ओर वे जर्मनी के चांसलर को पतंग उड़ना, पेंच लड़ाना, पतंग काटना सिखा रहे हैं तो दूसरी ओर अमेरिका और चाइना डोर काट कर भारत की पतंगे जमीन पर गिरा रहे हैं। भारत का इससे बड़ा दुर्भाग्य दूसरा हो नहीं सकता है।
अश्वनी बडगैया अधिवक्ता
स्वतंत्र पत्रकार


