संपादकीय। भारत को विश्व गुरु बनेगा और दुनिया भर में भारत का डंका बज रहा है ऐसा कहते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आये दिन जनता से हामी भरवाते रहते हैं कि आप भी मेरी हाँ में हाँ मिलाते हुए कहो कि अमेरिका, यूरोप, यूके, एशिया, आस्ट्रेलिया आदि आदि जगहों पर भारत का डंका बज रहा है और जनता के बीच में शामिल मानसिक तौर पर गुलाम लोगों के जत्थे हां - हां चिल्लाते रहते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि दुनिया भर से जो खबरें विदेशी मीडिया के जरिए जो निकल कर आती है वह बताती है कि दुनिया के हर देश में पीएम मोदी के डंके का ढोल फट रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो आये दिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मजाक उड़ाते हुए भारत की बेइज्जती करते रहते हैं और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुप्पी बरकरार रहती है। हाल ही में आस्ट्रेलिया से भी खबर आई है कि आस्ट्रेलियाई सांसद मैलकम रोबर्ट्स ने आस्ट्रेलियाई संसद के भीतर भारत का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि आस्ट्रेलिया के भीतर बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रीधारी लोग नौकरियां कर रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक 23000 से ज्यादा लोग फर्जी डिग्री को लेकर आस्ट्रेलिया में नौकरी कर रहे हैं जिनमें भारतीयों की संख्या बहुतायत में है। इन्हें डिपोर्ट किया जाना चाहिए। हाल ही में खुलासा किया गया है कि भारत में 22 से ज्यादा विश्वविद्यालय ऐसे हैं जो फर्जी डिग्री जारी करते हैं और वे फर्जी डिग्रीधारी विदेशों में नौकरी भी कर रहे हैं। वैसे भारत की फर्जी डिग्री को लेकर हो-हल्ला मचाना कोई मायने नहीं रखता है। क्योंकि जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री ही संदेहास्पद यानी फर्जी के दायरे में आती हो और नरेन्द्र मोदी "मौनम् स्वीकृति लक्षणम्" की तर्ज पर मौन स्वीकृति दे रहे हों तो फिर.......... ।
press Trust of India (PTI) X. Com - Video ! On board Air Force, US President Donald Trump. While interacting with the media. "Claims that India has substantially reduced its Oil purchases from Russia. He says. They wanted to make me happy. Basically, Modi is a very good man. He knew I was not happy, and it was important to make me happy. We do trade, and we can raise tariffs on them very quickly." Donald Trump # India us # oil trade. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को सपत्नीक जबरिया अगवा करने के बाद अपने हवाई जहाज में कैमरे के सामने पत्रकारों से गुफ्तगू करते हुए खुलेआम कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वे जानते हैं कि मैं (ट्रंप) खुश नहीं हूं। इसलिए उन्होंने मुझे खुश करने के लिए रशिया से तेल खरीदना कम कर दिया है क्योंकि वे जानते हैं कि अन्यथा मैं (ट्रंप) टैरिफ बढ़ा दूंगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पीएम मोदी को very good man कहना मानसिक रूप से गुलाम हो चुके मोदी भक्तों के लिए यह मोदी की तारीफ करना हो सकता है लेकिन 143 करोड़ देशवासियों में से मुट्ठी भर मोदी भक्तों को माइनस कर दिया जाय तो यह न केवल देशवासियों का अपमान है बल्कि यह भारतीय अस्मिता को खुली चुनौती है। भारत को खुलेआम धमकी है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुली धमकी के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खामोशी।
इतिहास गवाह है कि 15 अगस्त 1947 की आधी रात के बाद से 5 जनवरी 2026 के बीच जितनी भी घटनायें हुई हैं जिसमें चीन से हुआ युद्ध भी शामिल है जिसमें भारत ने बहुत कुछ गवांया था लेकिन उस दौर में भी भारत का स्वाभिमान, सम्मान, राष्ट्रीय गौरव उतना कलंकित नहीं हुआ था जितना 5 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुप्पी से हुआ है। देश के भांड़ मीडिया में से कुछ ने इस तरह की हेडलाइन लगाने का साहस दिखाया है "पीएम मोदी जानते थे मैं खुश नहीं हूं और.......... रूसी तेल पर ट्रंप की नई धमकी ! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से देश में पसरे सन्नाटे को तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, भारत सरकार की ओर से जो आवाज आनी चाहिए थी वह तो नहीं आई यहां तक कि वोट चोरी को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सप्रमाण लगाये जा रहे आरोपों का जवाब देने के लिए जहां चुनाव आयोग को सामने आना चाहिए वहां मोदी सरकार के मंत्री और भाजपाई प्रवक्ता सामने आकर चुनाव आयोग का बचाव करने खड़े हो जाते हैं लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कहे पर काउंटर करने के लिए कोई भाजपाई सामने नहीं आया बल्कि एनडीए की तरफ से छुटभैयों को आगे कर दिया गया विरुदावली गायन करने के लिए। Modi and the NDA and our government and our Prime Minister is strong in if to give a briefing answer and at the same time to take a decision which is in the best interest of India when if comes to the tariff has been his presence so we are not surprise and shock, but it is India's progressive if we want to buy oil from Russia, it's a matter of our snow if. So no third country can didact terms to Prime Minister Modi and are the NDA. And our government and our Prime Minister strong in if the best interests of India when it comes to the tariff. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी आगे आकर कहा कि टैरिफ एग्रीमेंट का जो पूरा का पूरा यह जो प्रकरण अस्तित्व में आया है उसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जिस तरह की आशंकाएं थी उसको निर्मूल सिध्द करते हुए कई ऐसे वैकल्पिक मार्ग तय किये गये हैं जिससे इन चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सका है और पूरी स्थिरता के साथ अर्थव्यवस्था लगभग 8 पर्सेंटेज के ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रही है फिर भी निसंदेह यह उत्पादकों के लिए, भारतीय उत्पादकों के लिए खास तौर पर चिंता की खबर है। लेकिन भारत सरकार इससे निजात दिलाने के लिए जरूर सोच समझ कर फैसले लेगी। भारत सरकार ने कौन - कौन से वैकल्पिक रास्ते बनाये गये हैं इसको पीएम से लेकर नीचे तक का कोई भी जिम्मेदार बताने को तैयार नहीं है। जेडीयू प्रवक्ता 2011 को बेस बनाकर जिस अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को 8 फीसदी बता रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 6.3 - 6.4 पर्सेंटेज पर नाक रगड़ रही है। हां नेताओं की इकाॅनामी की ग्रोथ बहुत बढ़िया है। वे सत्ता की मलाई चाट कर बड़ी बेशर्मी के साथ देश को ज्ञान बांट रहे हैं।
वेनेजुएला की घटना के बाद कोलंबिया जो हर मामले में भारत के एक बड़े राज्य से ज्यादा नहीं है वहां के राष्ट्रपति गुस्तावो फ्रांसिस्को पेट्रो उरेगो ओडीबी ओडीएससी ओडीआईसी चौराहे पर खड़े होकर अपने देशवासियों के बीच यह कहते हुए सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती दे रहे हैं "अगर मुझे जेल में डालना चाहते हो तो कोशिश करके देख लो। अगर मुझे नारंगी यूनीफॉर्म (जिसे पहनाकर डिटेंशन सेंटर, जेल में रखा जाता है) पहनाना चाहते हैं तो वो भी करके देख लो। कोलंबिया की जनता सड़क पर उतर कर मेरा बचाव करेगी"। एक छोटा सा देश अमेरिकी राष्ट्रपति को खुलेआम चुनौती दे रहा है और दुनिया का सबसे बड़े देशों में शुमार, 143 करोड़ की जनसंख्या वाले देश का खुद को 56 इंची सीने वाला कहने वाला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुतुरमुर्ग बनकर भारत को लज्जित करवा रहा है ! धिक्कारती है ऐसे प्रधानमंत्री को भारत की जनता ! शायद यह अतिश्योक्ति हो सकती है कि अगर देश के 143 करोड़ लोग एक साथ सांस खींचकर एक साथ छोड़ दें तो समुंदर में लहरों का ज्वालामुखी फट पड़ेगा। देशवासी सवाल कर रहे हैं कि यह 56 इंच की छाती टेलर मास्टर के इंची टेप से नपवाने भर के लिए है क्या ? गजब की बेइज्जती कराई जा रही है पीएम मोदी द्वारा देश की। इतनी बेइज्जती किसी भी प्रधानमंत्री के कालखंड में ना तो कभी देश की हुई है ना ही कभी होगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कालखंड के बाद। सवाल तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की इस बात को लेकर भी पूछा जा रहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी मुझे (ट्रंप को) खुश करना चाहता है तो कौन है ये ट्रंप ? हमारा कौन लगता है ये ट्रंप ? क्या हमारा भाग्यविधाता है ट्रंप ? हमारे देश का नेतृत्व ट्रंप को खुश क्यों करना चाहता है ? क्या डर है हमारे नेतृत्व को ट्रंप से ? पीएम नरेन्द्र मोदी की कौन सी फाइल, कौन सा राज, कौन सी नस दबी है ट्रंप के पास ? क्यों ब्लैकमेल हो रहे हैं पीएम मोदी ट्रंप से ? क्या पीएम मोदी को अपनी जनता, अपनी सैन्य शक्ति पर विश्वास नहीं है ?
जबकि हकीकत यह है कि भले ही वो सत्ता चुरा कर सत्ता में हैं, वैचारिक मतभेद हैं इसके बावजूद भी जब तक वो सत्ता में हैं बीजेपी या एनडीए के नहीं भारत के प्रधानमंत्री हैं लेकिन अगर कोई दूसरा देश भारत के प्रधानमंत्री को उठाने आयेगा तो पूरा देश अपने प्रधानमंत्री की हिफाजत के लिए सड़क पर होगा। कोलंबिया का राष्ट्रपति ललकार रहा है। चाइना कह रहा है हमको जहां से खरीददारी करनी होगी हम करेंगे। और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कथन पर ओंठ सिले बैठे हैं कि पीएम मोदी ने मुझे खुश करने के लिए रशिया से तेल खरीदना कम कर दिया है। नरेन्द्र मोदी को व्यक्तिगत तौर पर अपने मान सम्मान मोल भले ना हो लेकिन सवाल तो भारत के आत्मसम्मान का है ? भारतीय अस्मिता का है ? भारतीय प्रधानमंत्री भारत के आत्मसम्मान, अस्मिता का ध्वजवाहक होता है। तो ना सही अपने आत्मसम्मान के लिए भारत के आत्मसम्मान, भारतीय अस्मिता के लिए तो पीएम नरेन्द्र मोदी को मुंह खोलना ही चाहिए। श्रीमती इंदिरा गांधी का कालखंड रहा हो, मनमोहन सिंह, जिन्हें मोदी मौन मोहन सिंह, कमजोर पीएम, बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाने वाला पीएम और न जाने क्या - क्या कहते रहे हैं का कालखंड रहा हो या फिर बीजेपी के ही पितृ पुरूष माने जाने वाले अटलबिहारी बाजपेई का कालखंड रहा हो इनके सामने भी अमेरिका की कई चुनौतियां आई थीं लेकिन किसी ने भी भारत के स्वाभिमान, आत्मसम्मान, अस्मिता को गिरवी नहीं रखा अमेरिका की गोदी में जैसे नरेन्द्र मोदी अपने प्रधानमंत्रित्व कालखंड में रखते चले जा रहे हैं।
जिस आदमी के पास आने वाली पीढ़ी को देने के लिए भविष्य नहीं होता है, जिसमें अपने सुनहरे इतिहास को रचने की कूबत नहीं होती है वही इतिहास को कुरेदने में लगा रहता है और नरेन्द्र मोदी उसी पंक्ति में खड़े दिखाई दे रहे हैं। तो क्या इस दौर में निर्लज्जता का अमृत काल चल रहा है भारत के भीतर ? क्या ट्रंप अपने थर्मामीटर से मोदी की बेशर्मी का टेंपरेचर नाप रहे हैं ? वेनेजुएला की घटना के बाद जब पूरी दुनिया की प्रतिक्रिया निकल कर आ गई उसके बाद भारत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रेस विज्ञप्ति जारी की वह भी अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिखे बिना। अगर नरेन्द्र मोदी बतौर भारत के प्रधानमंत्री भारत के आत्मसम्मान, उसकी अस्मिता का मान नहीं रख सकते तो देश के लिए बेहतर होगा कि वे सत्ता दूसरे हाथ में सौंप दें। अपने व्यक्तिगत ब्लैकमेल के लिए पूरे देश को ब्लैकमेल करवाने से बेहतर है इस्तीफा देकर झोला उठाकर चल देना। लेकिन जिस तरह से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बेइज्जती कराकर भी नरेन्द्र मोदी कुर्सी से चिपके हुए हैं उससे तो यही संदेश निकलता है कि उन्हें भारत से नहीं कुर्सी से प्यार है। उनके लिए पीएम की कुर्सी, सत्ता, अडानी, अंबानी ही सब कुछ है। बीजेपी के नेता सच ही कहते हैं कमल कीचड़ में खिलता है और बीजेपी का कमल भी भृष्टाचार, व्यभिचार, दुराचार के कीचड़ में खिल रहा है। भारत का रीढ़ विहीन मीडिया लिख रहा है अमेरिका अगर वेनेजुएला पर कब्जा कर लेता है तो भारत को 2000 करोड़ का फायदा होगा।
अश्वनी बडगैया अधिवक्ता
स्वतंत्र पत्रकार


