भोपाल। दूध में कथित तौर पर पाम ऑयल और अन्य मिलावटी पदार्थ मिलाकर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा करने के आरोपों में जेल में बंद मिल्क फूड कंपनी के संचालक किरण मोदी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका इलाज नहीं, बल्कि हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान मिली कथित VIP सुविधाएं हैं। अस्पताल से सामने आई तस्वीरों के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, दूध में मिलावट और करीब 19.69 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के मामले में आरोपी किरण मोदी न्यायिक हिरासत में हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते उन्हें केंद्रीय जेल से भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल से सामने आई तस्वीरों में किरण मोदी बेड से हथकड़ी के जरिए बंधे दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी तस्वीर में उनके पास मोबाइल फोन होने और परिजनों के मिलने की बात सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।
बताया जा रहा है कि आरोपी से अस्पताल में रिश्तेदार मुलाकात कर रहे थे। तस्वीरों में एक व्यक्ति मोबाइल फोन का उपयोग करता हुआ भी दिखाई दे रहा है, जिससे यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या अस्पताल में भर्ती बंदियों के लिए लागू सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था।
गौरतलब है कि जांच एजेंसियों के अनुसार किरण मोदी की कंपनी पर दूध में पाम ऑयल सहित अन्य मिलावटी पदार्थ मिलाकर उत्पाद बेचने और लगभग 19.69 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने के आरोप हैं। बताया जाता है कि पिछले करीब 13 वर्षों में कंपनी का कारोबार लगभग 600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। मामले की जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जेल अधीक्षक का पक्ष
मामले में केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक मानेंद्र सिंह परिहार ने कहा,
"बंदी को पूरे समय हथकड़ी लगाए रखना आवश्यक है। केवल वॉशरूम जाते समय ही हथकड़ी खोली जाती है। मोबाइल का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। बाहर से भोजन भी नहीं लाया जा सकता। यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही हुई है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।"
जांच पर टिकी निगाहें
अस्पताल से सामने आई तस्वीरों के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अस्पताल में आरोपी को कथित रूप से मिली सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन क्या जांच करता है और यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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| रवि कुमार गुप्ता, संपादक |



