वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के नमो घाट से सामने आई दो पर्चियों की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। एक तरफ नमो घाट के नाम से जारी पार्किंग पर्ची पर दोपहिया वाहन के लिए 20 रुपये शुल्क और वाहन की सुरक्षा को लेकर साफ लिखा है—‘Parking to Owner Risk’। वहीं दूसरी पर्ची पर कमल के फूल के चुनाव चिह्न के साथ हाथ से लिखा है—‘8 क्वार्टर दे देना’।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नमो घाट की पार्किंग व्यवस्था में वाहन मालिक को सुरक्षा की जिम्मेदारी से अलग कर दिया गया है, तो पार्किंग शुल्क किस सुविधा के नाम पर वसूला जा रहा है? आखिर वाहन चोरी या नुकसान होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
लेकिन दूसरी पर्ची ने इस मामले को और दिलचस्प बना दिया है। इस पर कमल के फूल का चुनाव चिह्न छपा है और नीचे हस्ताक्षर के साथ ‘8 क्वार्टर दे देना’ लिखा नजर आ रहा है। आखिर यह पर्ची किसने जारी की? आठ क्वार्टर किसके लिए मांगे गए और इसका नमो घाट की पार्किंग पर्ची से क्या संबंध है?
दो पर्चियां, दो अलग-अलग सवाल और जवाब किसी के पास नहीं!
यह मामला केवल 20 रुपये की पार्किंग वसूली तक सीमित नहीं है। सवाल सार्वजनिक स्थल पर पार्किंग व्यवस्था की पारदर्शिता, वाहन सुरक्षा और दूसरी पर्ची की वास्तविकता को लेकर भी हैं।
हालांकि, इन तस्वीरों के आधार पर दोनों पर्चियों के बीच किसी सीधे संबंध या किसी राजनीतिक दल अथवा सरकारी व्यवस्था की संलिप्तता की पुष्टि नहीं होती। इसकी निष्पक्ष जांच और संबंधित जिम्मेदारों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
अब सवाल जिम्मेदारों से है—क्या नमो घाट की पार्किंग व्यवस्था में वाहन मालिकों को सिर्फ पर्ची थमाई जा रही है, या उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी कोई लेने को तैयार है? और आखिर ‘8 क्वार्टर’ वाली पर्ची का सच क्या है?
जनता जवाब चाहती है, जिम्मेदारों को जवाब देना होगा।


