संगत का असर भी एक दिन रंग दिखाता है
इंसान जिस तरह की संगत में रहता है उसका एक न एक दिन रंग जरूर दिखाई देता है। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे सिविल सर्जन डॉक्टर यशवंत वर्मा का असर भतीजे के सिर चढ़कर बोल रहा है। आपको बता दे कि सिविल सर्जन डॉक्टर यशवंत वर्मा का भतीजा और डॉक्टर दिलीप वर्मा का 30 वर्षीय पुत्र अर्जित वर्मा कम समय में करोड़पति बनने की होड़ में आज उसे जेल की रोटी तोड़ना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि 28 दिन पूर्व जिला अस्पताल में कटनी कोतवाली में कटनी समेत अन्य जगह के लोग अर्जित वर्मा की ठगी का शिकार होने पर लिखित शिकायत दी गई थी। जिसको लेकर कार्रवाई करने के नाम पर पुलिस द्वारा काफी दिनों तक टाइम पास करते हुए आरोपी अर्जित वर्मा को बचाने का प्रयास किया जाता रहा है। मामला तूल पकड़ता देख पुलिस ऐक्टिव हुई और ठग अर्जित वर्मा को पुलिस ने घर से दबोच लिया। आपको बता दे कि स्वास्थ्य मंत्री के तथाकथित लैटर पैड के बल पर मेटरनिटी पैड की सप्लाई और सरकारी टेंडर मिलने की बात पर लगभग आधा दर्जन लोगों से 1करोड़ 39 लाख की ठगी की गई थी। और यह खबर जग जाहिर होने के बाद भी कार्रवाई देर से होने पर पुलिस पर भी कई तरह के सवाल खड़े होना लाजमी है। जग जाहिर कहना भी उचित होगा क्योंकि मामला स्वास्थ्य मंत्री से जुड़ा हुआ होने के कारण और भी ज्यादा हाईप्रोफाइल हो गया था। खैर देर आये दुरुस्त आये वाली भी कहावत पुलिस पर ठीक ठाक बैठती है।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि महज 30 साल का अर्जित वर्मा इतना बड़ा कदम अकेले तो नहीं उठा सकता। करोड़ो की ठगी वह भी स्वास्थ्य मंत्री के फर्जी लेटर पैड का उपयोग करते हुए या उपयोग करवाने वाला अर्जित वर्मा के पीछे कौन है इसका मास्टर माइंड। इतनी कम उम्र का युवक इतनी बड़ी ठगी करने की हिम्मत कर पाना समझ से परे है। पुलिस ने भी अपनी जांच में एक बात साफ कर दी कि स्वास्थ्य मंत्री का अर्जित वर्मा द्वारा इस्तेमाल किया गया लैटर पेड पूरी तरह फर्जी साबित हुआ। जिसकी जांच के बाद कोतवाली पुलिस ने माधवनगर थाना क्षेत्र के समदडिया सिटी से अर्जित वर्मा को घर से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। पुलिस ने आरोपी अर्जित वर्मा पर अपराध क्रमांक 351/ 2023 धारा 420, 467,468,471 IPC के तहत मामला कायम कर न्यायालय में पेश किया जहां से अर्जित वर्मा को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसी तरह पुलिस यदि इस मामले की जांच और भी बारीकी से करे तो और भी कई खुलासे होने से इंकार नहीं किया जा सकता। हो सकता है अर्जित वर्मा इस ठगी का मात्र एक मोहरा हो और इसका सूत्रधार एवं मास्टरमाइंड अस्पताल का ही कोई शातिर निकले। आपको बता दे कि 1 करोड़ 39 लाख का जो मामला उजागर हुआ है ये तो महज ऊंट के मुंह में जीरा से ज्यादा कुछ भी नहीं है। जिस तरह कोतवाली पुलिस ने अपनी सोई हुई ऊर्जा को जाग्रित करके अर्जित वर्मा को बेनकाब किया है इसी कड़ी को साथ लेकर और खोजबीन में जुटने का प्रयास करे तो सम्भवतः भ्रष्टाचार करने वालों का एक बड़ा नेटवर्क निकलकर सामने आ सकता है। सूत्रों पर भरोसा करें तो स्वास्थ्य मंत्री के फर्जी लैटर पैड का उपयोग करने और करवाने में पर्दे के पीछे सफेद पोशों के हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि इतने बड़े षडयंत्र के पीछे एक मामूली सा अर्जित वर्मा के अकेले का हाथ होना संभव नहीं है। सघन जांच के बाद ही तमाम भ्रष्टाचारी पर्दे के पीछे से निकल कर सामने आएंगे और फिर हो सकता है सफेद पोशाक में अपने आप को उजला दिखाने वाले राजनेता पर भी भ्रष्टाचार की स्याही नजर आये और इनके पकड़े जाने से जेल में चार चांद लग जाये।
रवि कुमार गुप्ता - संपादक ( जन आवाज )