जो सत्ता से डर जाए, विज्ञापन देख झुक जाए, सुविधा देखकर बिक जाए - - वो पत्रकार हो ही नहीं सकता
#डर

जो सत्ता से डर जाए, विज्ञापन देख झुक जाए, सुविधा देखकर बिक जाए - - वो पत्रकार हो ही नहीं सकता

खरी-अखरी(सवाल उठाते हैं पालकी नहीं) कटनी। वैसे तो पत्रकारों की दो ही नस्ल होती है। एक वो जो सवाल छेड़ते हैं, दूसरे वो ज…

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