कटनी। वर्ष 2025 की विदाई पर कटनी पुलिस ने उपलब्धियों का भारी-भरकम प्रेस नोट जारी कर खुद को अपराध नियंत्रण का अगुआ साबित करने की औपचारिक रस्म निभा दी। ऑपरेशन शिकंजा, साइबर कार्रवाई, जिलाबदर, एनएसए और यातायात चालानों के आंकड़ों का ढोल पीटते हुए पुलिस ने अपनी पीठ खुद थपथपा ली?
लेकिन ज़मीनी हकीकत इन काग़ज़ी दावों को आईना दिखा रही है, जहां अपराधी बेखौफ, और आम नागरिक असुरक्षित नजर आया।
दूसरे राज्यों से आए लुटेरे, कटनी बना सुरक्षित ठिकाना
कटनी जिले में राज्य के बाहर से आए लुटेरे गिरोह बेधड़क वारदात करते रहे। सीमावर्ती इलाकों में न सख्त चेकिंग दिखी, न अंतर्राज्यीय समन्वय।
नतीजा साफ था अपराधी आए, लूट की, और निकल गए, पुलिस के हिस्से सिर्फ बाद में जारी किए गए प्रेस नोट रह गए।
नाबालिग बने नशे और खून के औज़ार
सबसे शर्मनाक और खतरनाक सच्चाई यह रही कि नाबालिगों से नशे की सप्लाई कराई गई और उन्हें हत्याओं तक में इस्तेमाल किया गया। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की नाकामी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर आरोप है।
सवाल सीधा है - किसके संरक्षण में बच्चों को अपराध की आग में झोंका गया?
हत्या, लूट, डकैती बढ़ती रहीं—और कप्तान खिताब बंटवाते रहे.?
तत्कालीन कप्तान रंजन के तबादले के बाद जिले में हत्याओं, लूट, चोरी और डकैती का ग्राफ अचानक उफान पर पहुंच गया। इसी बीच पुलिस कप्तान एक निजी अखबार में कटनी पुलिस को “जांबाज़ पुलिस” का तमगा दिलवाने में व्यस्त रहे। जब सड़कों पर खून बह रहा था, तब अखबारों में तारीफों की सुर्खियां छप रही थीं।
देव ऑडियो शॉप चोरी: ‘चाक-चौबंद’ सुरक्षा की खुली पोल
30 दिसंबर की आधी रात कटनी के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके, राघव रिजेंसी होटल के बाजू में स्थित देव ऑडियो शॉप का शटर लोहे की रॉड से उठाकर लाखों का सामान साफ कर दिया गया। सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह कि दुकान में लगे सीसीटीवी का DVR तक उठा ले जाया गया, फिर भी पुलिस न फुटेज से नतीजे पर पहुंची, न किसी आरोपी तक। यह वारदात उसी रात हुई, जब पुलिस पूरी रात चाक-चौबंद व्यवस्था का दावा कर रही थी—जो दावा उसी रात धराशायी हो गया।
सीसीटीवी, मुखबिर और गश्त सब सिर्फ कागज़ों में
“कटनी की सजग दृष्टि” जैसी योजनाएं पोस्टरों और प्रेस नोटों में चमकती रहीं, लेकिन मैदान में सीसीटीवी, मुखबिर तंत्र और रात्रि गश्त तीनों फेल नजर आए।
करोड़ों खर्च के बाद भी अगर सबसे व्यस्त इलाके में चोरी हो जाए, तो यह तकनीकी नहीं प्रशासनिक विफलता है।
जनता के सीधे और तीखे सवाल
1. बाहरी लुटेरे जिले में घुसते कैसे रहे?
2. नाबालिग अपराध का हथियार क्यों बने?
3. बढ़ती हत्याओं की जिम्मेदारी कौन लेगा?
4. क्या पुलिसिंग अब थानों की जगह प्रेस नोटों से चल रही है?
कटनी की जनता अब ‘जांबाज’ के तमगों से नहीं, ठोस और दिखने वाली कार्रवाई से सुरक्षा चाहती है।वरना हर साल प्रेस नोट बदलेंगे, बयान बदलेंगे लेकिन अपराधियों का हौसला और ज्यादा बुलंद होता जाएगा।


