कटनी। मध्यप्रदेश सरकार का बजट प्रचारात्मक बजट है। यह उस ढोल के समान है जिसकी आवाज सुंदर लगती है पंरतु ढोल भीतर से खोखला होता है। प्रदेश सरकार नये वर्ष में 54,448 करोड़ का कर्ज लेगी। जबकि, पहले से ही मध्य प्रदेश भारी कर्जदार है। और बजट की एक बड़ी राशि कर्ज का ब्याज चुकानी पर जाएगी। नि:शुल्क उपचार योजना के अंतर्गत ₹500000 प्रति बीमार की दर से इलाज के लिए 2500 करोड़ रूपया मात्र रखे गए हैं। यानी पूरे वर्ष में पूरे प्रदेश में केवल 50,000 लोगों को इस योजना के तहत उपचार मिल सकेगा। यानी एक दिन में पूरे प्रदेश में मुश्किल से 150 लोगों के लिए इस योजना का लाभ मिलेगा। प्रदेश की आबादी आज लगभग 9 करोड़ के आसपास है। सरकार ने तो एक पुरानी कहावत ऊंट के मुंह में जीरा को भी पार कर लिया। छात्रवृत्ति, पेंशन, सामाजिक पेंशन आदि योजनाएं पूर्ववत हैं और उन्हीं का निरंतरीकरण किया गया है।
सिंचाई का लक्ष्य 7.50 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 20 लाख एकड़ जमीन में सिंचाई वृद्धि का रखा गया है। परंतु सिंचाई और कृषि के क्षेत्र पर जो बजट आवंटित किया गया है वह इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए नाकाफी है। सिंचाई और कृषि पर कुल 88,900 करोड रुपए का बजट है। जिसका लगभग 50% स्थापना व्यय में चला जाता है। और वास्तविक विकास का व्यय लगभग 44,000 करोड रुपए होगा। क्या इतनी राशि से 20 लाख एकड़ जमीन को सिंचित किया जा सकेगा। सरकार ने दूध उत्पादन के लिए 2,364 करोड रुपए का प्रावधान किया है परंतु यह दूध उत्पादन की वृद्धि किस रूप में होगी यह स्पष्ट नहीं है।
3000 गौशालाओं के आधुनिकीकरण का लक्ष्य रखा है यह आधुनिकीकरण किस रूप में होगा यह भी स्पष्ट नहीं है। छात्रों को साइकिल योजना एक अच्छी योजना है और इसके लिए सरकार की मैं तारीफ करूंगा। प्रत्येक जिले में खाद्य प्रसंस्करण की यूनिट खोलने का प्रस्ताव भी व्यवहारिक और अच्छा प्रस्ताव है। यह मांग लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी कई वर्षों से लगातार कर रही थी। इसके लिए मुख्यमंत्री को बधाई।
1 लाख सोलर पंप लगाने की योजना भी कृषि के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। जिसकी प्रशंसा की जानी चाहिए। फसल बीमा पर रखी गई राशि 1299 करोड़ प्रदेश की जरूरत के हिसाब से और पिछले वर्षों के फसलों की क्षति के आंकलनों के अनुसार बहुत कम और आपर्याप्त हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश के बड़े-बड़े महानगरों में जाकर जो इन्वेस्टर्स समिट किये थे उनका कोई विवरण या उपलब्धि इस बजट में नजर नहीं आती। आज से लगभग 35 वर्ष पहले भारतीय जनता पार्टी ने कर्ज मुक्त प्रदेश बनाने का वायदा किया था और यह वायदा भाजपा लगातार करती आ रही है परंतु कर्ज निरंतर बढ़ रहा है। सरकार की वोट खरीदो योजनाओं पर जो खर्च किया जा रहा है उसे एक ही एक वाक्य में कहा सकता है चार्वाक ने कहा था "ऋनम कृत्वा घृतम पियेत"। इस बजट की सही व्याख्या यही है की कर्ज लो और घी पियो।
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| रवि कुमार गुप्ता, संपादक ( जन आवाज ) |



