कटनी। पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा चाहे जितना जोर लगा लें अवैध कारोबार को बंद कराने का, लाख कोशिश कर ऑपरेशन शिकंजा चलाने का, कभी सफल नहीं हो सकते.? क्योंकि उनके हाथ के नीचे काम करने वाले थाना प्रभारी पुलिस अधीक्षक की मंशा को पूरी होना ही नहीं देना चाहते इसकी खास वजह ये है कि थाना प्रभारी का ऊपरी खर्चा इन्हीं अवैध कारोबार करने वालों के बूते ही चलता है.? यदि अवैध कारोबार बंद तो पुलिस थानों की ऊपरी कमाई पर ग्रहण लग जाएगा। जिसकी बानगी कुठला थाना क्षेत्र में सट्टा के रूप में फैले मकड़जाल से समझा जा सकता है। आपको बता दें कि जिले में सट्टा बाजार की आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। जिसकी चपेट में आकर मध्यम और गरीब वर्ग का आदमी हर रोज झुलस रहा है।
जुटाई गई जानकारी के अनुसार कुठला थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में कई वर्षों से एक परिवार अपने घर के पिछवाड़े बनाई गई कुलिया नुमा खिड़की से सट्टा पट्टी काट लोगों को कंगाल कर मालामाल होने में लगा है। खुद तो अवैध सट्टा की कमाई से बिल्डिंग तान लिया और मजदूर, पल्लेदार एवं मध्यम वर्ग के लोग लालच के मकड़जाल में फंस कर अपने बीबी बच्चों के मुंह का निवाला और उनका हक मारकर मेहनत की कमाई से सटोरिया का पेट भर रहा है।
आपकी बता दें कि कुठला थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में लंबे अरसे से सट्टा का कारोबार घर में बैठ कर पूरा बरसैंया परिवार कर रहा है। सबसे बड़ी बात ये है कि बरसैंया परिवार को सट्टा खिलाने की मौन सहमति के अलावा इस बात की अनुमति दी गई है कि सटोरिया अपने साथ - साथ कुठला थाना प्रभारी और उनके मातहतों की पूरी तरह जी हजूरी करेगा। साथ ही हर माह की एक फिक्स तारीख को 30 हजार के करीब बतौर नजराना पेश करने की शर्त पर ओपन टू क्लोज का धंधा कर सकता है।
सूत्र बताते हैं कि सट्टा के कारोबार की थाना प्रभारी से परमिशन की सेटिंग सटोरिया की मम्मी के द्वारा की गई है। सूत्र ये भी बताते हैं कि सटोरिया की मम्मी का दिया हुआ ऑफर थाना प्रभारी तीन नहीं बल्कि एक ही बार के कबूलनामा से खुशी - खुशी राजी हो गए.? बताया जाता है कि बरसैंया परिवार सट्टा के अवैध कारोबार को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए बाकायदा चारों ओर सीसीटीव्ही कैमरे लगा कर घर के अंदर से निगरानी कर खुद के अलावा कारोबार को सुरक्षा कवच पहनाए हुए है। जिस दिन से कुठला थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा ने थाने का पदभार संभाला है शायद ही कभी सटोरिया बरसैंया परिवार के यहां छापामार कार्रवाई हुई हो.?
ऐसे में साफ समझा जा सकता है कि थाना प्रभारी पुलिस की वर्दी पहन कर अपने कर्तव्य और देश भक्ति जन सेवा के प्रति कितने वफादार एवं ईमानदार हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि सरकार से मिलने वाला वेतन शायद इनके तन के लिए पर्याप्त नहीं है जिससे रिटायर होने की दहलीज पर आकर भी मन की भूख पूरी नहीं हो रही और खाकी पर टाट का पैबंद लगाने में लगे हुए हैं।
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| रवि कुमार गुप्ता, संपादक (जन आवाज ) |

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