माननीय सुप्रीम कोर्ट के एक मिनिट के वीडियो का जिस तरह सहारा लिया गया है इससे साफ हो जाता है कि किस तरह कोर्ट बदनाम करने और झूठ फैलाने की मंशा साफ नजर आ रही है। आपको बता दें कि ये जो वीडियो वायरल किया गया है केवल झूठ परोसने और सामने वाले व्यक्ति को पूरी तरह बदनाम करने के उद्देश्य एक वेबसाइट से निकाला गया है। लेकिन वीडियो का सहारा लेकर बदनाम करने वालों की मंशा पर पूरी तरह पानी फिर गया। माननीय सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का वीडियो अंग्रेजी में है। जिसका हिंदी अनुवाद करने के बाद निष्कर्ष ये निकल कर आया कि मात्र एक मिनिट के वीडियो में 20 वे सेकंड में माननीय जज साहब बिना नाम लिए ये पूंछते हैं कि इस केस गोयनका कौन हैं ? पिटीशनर या रिस्पोंडेंट ?
जिस पर वकील ये जवाब देते हैं कि मैं यहाँ पर गोयनका ग्रुप का प्रतिनिधित्व कर रहा हूँ जो की याचिकाकर्ता हैं । इस पर माननीय जज साहब ये कहते हैं की ये कोर्ट इस मामले को नहीं नहीं सुनेगी।अभी तो ये भी स्पष्ट नहीं है की ये किस गोयनका समूह का केस है क्योंकि कोई ऑर्डर ही प्रस्तुत नहीं किया गया है ।
15 -20 साल पहले जो लोग रेत चोरी को लेकर बसाड़ी कांड करवा चुके हैं वो जमाने को अपना कर्मचारी बता रहे हैं। क्या महेंद्र गोयनका वाकई फरार हैं ? देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति जिनके ऊपर कोई केस नहीं है वो फरार क्यों रहेंगे ?
हा इतना जरूर है की कटनी में अपने सगे चाचा और चाची के नाम की आयरन ओर की खदान को हड़प कर, वन भूमि से खनिज चोरी करके करोड़पति बने टुच्चे लोग किसी के लिए भी कुछ भी दुष्प्रचार करवा देते हैं और जानता को मूर्ख समझते हैं । जो दूसरों का दमन करते वक्त अपने अहंकार में चूर ये नहीं समझ पाते की जब सामने वाला जवाब देगा तो भागते का रास्ता नहीं मिलेगी ।
और अंत में इतना ही कहेंगे कि जो लोग किसी को भी अपना कर्मचारी बताने में देर नहीं करते उनके ख़ुद के दोस्त और कर्मचारी किस हालत में रहते हैं पूरा जिला जानता है। इतनी समझ होती तो आज ये दिन ना देखने पड़ते। किसी के तो सगे हो जाते भैया जी।


