कटनी। सत्ता में अपनी ही सरकार होने के बावजूद अगर किसी सत्ताधारी दल के पदाधिकारी को अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ प्रशासन से गुहार लगानी पड़े, तो यह सवाल व्यवस्था पर जरूर खड़ा होता है। कटनी में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां भाजपा देवरी हटाई मंडल अध्यक्ष नितिन पाण्डेय ने कलेक्टर को पत्र सौंपकर क्षेत्र में कथित तौर पर संचालित हो रहे अवैध अहातों और मुख्य मार्ग पर शराब दुकानों को लेकर कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने अपने पत्र में हिरवारा, देवरी हटाई और निवार क्षेत्र में शराब ठेकेदारों द्वारा कथित तौर पर अवैध तरीके से शराब पिलाने की व्यवस्था संचालित किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इन स्थानों पर लोगों को खुले में शराब पीते देखा जाता है, जिससे आम नागरिकों, महिलाओं और स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मुख्य मार्ग पर शराब दुकान को लेकर भी सवाल
पत्र में कहा गया है कि हिरवारा ग्रामीण क्षेत्र से शहर आने-जाने का प्रमुख मार्ग है। सुबह और शाम बड़ी संख्या में महिलाओं और विद्यार्थियों का आवागमन होता है। ऐसे में शराब दुकान के सामने सड़क किनारे शराब पीने वालों की मौजूदगी से राहगीरों को निकलने में परेशानी होती है और आए दिन विवाद की स्थिति बनने की बात भी पत्र में कही गई है।
कई गांवों में अवैध अहातों का आरोप
नितिन पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि हिरवारा, देवरी हटाई और निवार क्षेत्र में कई स्थानों पर कथित अवैध अहाते संचालित हो रहे हैं। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि मंदिर, स्कूल और ग्राम पंचायत जैसे प्रमुख स्थानों के आसपास भी शराब पिलाने का काम चल रहा है।
इतना ही नहीं, उन्होंने कटनी जनपद की 19 ग्राम पंचायतों के प्रमुख स्थानों पर अवैध शराब कारोबार बढ़ने का आरोप लगाते हुए आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
भाजपा नेता ने कलेक्टर से मांग की है कि बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पंचायतों में कथित अवैध अहातों का संचालन बंद कराया जाए। साथ ही शराब दुकानों को मुख्य मार्ग से 300 मीटर दूर और बस्ती से दूर किए जाने की मांग की गई है।
इस पत्र की प्रतिलिपि बड़वारा विधायक, पुलिस अधीक्षक कटनी, जिला आबकारी अधिकारी सहित संबंधित थाना प्रभारियों को भी भेजी गई है।
अब सवाल यह है कि जब सत्ताधारी दल के ही मंडल अध्यक्ष को अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक देनी पड़ रही है, तो आखिर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है? शिकायत में लगाए गए आरोपों पर प्रशासन और आबकारी विभाग क्या कदम उठाता है, यह देखना अहम होगा।


