कटनी। नकली शराब से लोगों की जान जाने के बाद भी आबकारी विभाग की व्यवस्थाएं कितनी गंभीर हैं, इसकी बानगी कटनी में देखने को मिल रही है। सागर में नकली शराब से हुई मौतों के बाद विभाग ने संदिग्ध और नकली शराब की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए, लेकिन कटनी में जारी नंबर 07622-231217 पर इनकमिंग कॉल की सुविधा ही बंद है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब शिकायत सुनने वाला नंबर ही काम नहीं कर रहा, तो आम नागरिक नकली शराब की सूचना आखिर किसे और कैसे दे?
जागरूकता का संदेश, लेकिन शिकायत व्यवस्था बेअसर!
आबकारी विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि शराब के स्वाद, गंध, रंग या गुणवत्ता में किसी भी तरह का बदलाव महसूस होने पर उसका सेवन न करें। साथ ही केवल लाइसेंसी दुकानों से ही शराब खरीदने की सलाह दी गई है।
लेकिन विभाग की इस अपील के बीच सबसे बड़ा सवाल शिकायत व्यवस्था को लेकर है। एक तरफ लोगों को संदिग्ध शराब की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जारी हेल्पलाइन नंबर पर इनकमिंग कॉल ही नहीं आ रही। ऐसे में विभाग की जागरूकता मुहिम और जमीनी व्यवस्था के बीच बड़ा अंतर नजर आता है।
QR कोड स्कैन कर ऐसे करें पहचान
विभाग के मुताबिक शराब की बोतल पर लगे QR कोड को स्कैन करके ब्रांड, बॉटलिंग यूनिट, बैच नंबर और निर्माण से जुड़ी तारीख जैसी जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं।
इसके अलावा कंपोजिट शराब दुकानों पर जागरूकता पोस्टर भी लगाए गए हैं। विभाग ने बताया है कि देशी शराब के लेबल का रंग नारंगी और विदेशी शराब के लेबल का रंग नीला होता है।
सवाल आबकारी विभाग से...
नकली शराब के खिलाफ अभियान चलाना और लोगों को जागरूक करना अच्छी पहल है, लेकिन जब सूचना देने के लिए जारी नंबर ही काम नहीं कर रहा, तो इस अभियान की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या आबकारी विभाग ने नंबर जारी करने से पहले उसकी जांच करना भी जरूरी नहीं समझा? क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी है? और सबसे बड़ा सवाल—अगर किसी नागरिक को नकली शराब की जानकारी मिले, तो वह तत्काल शिकायत कहां करे?
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग इस तकनीकी खामी को कब दूर करता है और नागरिकों के लिए प्रभावी शिकायत व्यवस्था कब सुनिश्चित करता है।



