वर्षों से चली आ रही गैर-राजनीतिक परंपरा पर उठे सवाल, सत्ता पक्ष के युवा नेता को कथित प्रायोजन देने की चर्चा से गरमाया माहौल
कैमोर/कटनी। एसीसी कैमोर का दशहरा आखिर अपनी परंपरा और पहचान के साथ मनाया जाएगा या इस बार उस पर सियासत का रंग चढ़ेगा? वर्षों से गैर-राजनीतिक स्वरूप में आयोजित होता आ रहा यह ऐतिहासिक आयोजन अब सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि कंपनी प्रबंधन इस बार आयोजन की पुरानी परंपरा से हटकर सत्ता पक्ष के एक युवा नेता को प्रायोजित कर रहा है। यदि ऐसा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब एसीसी का दशहरा भी राजनीतिक प्रभाव और प्रायोजन की नई व्यवस्था के हवाले होने जा रहा है?
एसीसी कैमोर का दशहरा केवल एक कंपनी का वार्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की आस्था, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक रहा है। इस आयोजन में विभिन्न धर्मों, वर्गों और विचारधाराओं के लोग शामिल होते हैं। यही वजह है कि दशहरे की पहचान हमेशा से एक साझा सांस्कृतिक उत्सव के रूप में रही है, न कि किसी राजनीतिक दल के शक्ति प्रदर्शन के मंच के रूप में।
जब सत्ता पक्ष के प्रस्ताव भी हो चुके हैं खारिज
बताया जाता है कि अतीत में सत्ता पक्ष के प्रतिनिधियों की ओर से आर्केस्ट्रा और देवी जागरण जैसे कार्यक्रम आयोजित कराने के प्रस्ताव कंपनी प्रबंधन के समक्ष रखे गए थे। लेकिन उस समय कंपनी ने कथित तौर पर इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। इसके पीछे कंपनी की छवि, आयोजन की निष्पक्षता और दशहरे को राजनीतिक विवाद से दूर रखने की दलील दी गई थी।
तब कंपनी प्रबंधन का रुख स्पष्ट माना जाता था कि एसीसी जैसी प्रतिष्ठित कंपनी के आयोजन में किसी राजनीतिक व्यक्ति या बाहरी पक्ष के नाम को प्रमुखता देने से कंपनी की छवि प्रभावित हो सकती है। यही कारण रहा कि कार्यक्रम एसीसी दशहरा कमेटी के माध्यम से आयोजित होते रहे।
लेकिन अब परिस्थितियों में बदलाव की चर्चा है। सवाल यह है कि जिस सिद्धांत के आधार पर पहले राजनीतिक प्रस्तावों को ठुकराया गया, क्या इस बार उसी सिद्धांत से समझौता किया जा रहा है?
क्या कंपनी प्रबंधन पर हावी हो गई राजनीति?
इस पूरे मामले में कंपनी के डायरेक्टर सुदीप्तो मंडल और हेड एचआर दिनेश पाठक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि इस बार कंपनी की ओर से सत्ता पक्ष के एक युवा नेता को कार्यक्रम के लिए प्रायोजन दिया जा रहा है। हालांकि, इस कथित प्रायोजन की प्रकृति, शर्तों और कंपनी की आधिकारिक स्थिति की पुष्टि होना अभी बाकी है।
यदि कंपनी की ओर से किसी राजनीतिक व्यक्ति को विशेष रूप से प्रायोजित किया जा रहा है, तो यह जानना जरूरी होगा कि इस निर्णय का आधार क्या है? क्या यह फैसला एसीसी दशहरा कमेटी की सहमति से लिया गया है? क्या आयोजन की जिम्मेदारी और पहचान पहले की तरह कमेटी के पास ही रहेगी, या इस बार किसी व्यक्ति विशेष को केंद्र में रखकर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है?
ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब कंपनी प्रबंधन और आयोजन समिति को स्पष्ट रूप से देना चाहिए।
कंपनी की साख बड़ी या राजनीतिक पहुंच?
एसीसी जैसी बड़ी औद्योगिक कंपनी की अपनी प्रतिष्ठा, संसाधन और संस्थागत पहचान है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि वर्षों से अपने स्तर पर भव्य आयोजन करती आ रही कंपनी को आखिर बाहरी या राजनीतिक प्रायोजन की जरूरत क्यों पड़ रही है?
यदि आयोजन में किसी व्यक्ति या राजनीतिक समूह को विशेष स्थान दिया जाता है, तो आम लोगों के मन में यह धारणा बन सकती है कि दशहरे जैसे सार्वजनिक महत्व के सांस्कृतिक कार्यक्रम का इस्तेमाल राजनीतिक पहचान मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कंपनी की निष्पक्षता और आयोजन की पारंपरिक पहचान पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रायोजन से संबंधित वास्तविक तथ्यों को सामने आना जरूरी है।
सर्वधर्म समभाव के उत्सव को सियासत से दूर रखना जरूरी
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व लोगों को जोड़ने और सामाजिक सद्भाव मजबूत करने का संदेश देता है। ऐसे आयोजन में यदि राजनीतिक पक्षधरता का आभास होने लगे, तो वर्षों से जुड़ी सामुदायिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
कैमोर के लोगों के लिए महत्वपूर्ण यह नहीं है कि मंच पर किस राजनीतिक विचारधारा का प्रभाव दिखाई देता है, बल्कि यह है कि दशहरा सभी का बना रहे। आयोजन की पहचान किसी एक व्यक्ति, दल या सत्ता की निकटता से नहीं, बल्कि उसकी परंपरा, भव्यता और जनभागीदारी से होनी चाहिए।
अब जवाबदेही कंपनी प्रबंधन की
एसीसी कैमोर के दशहरे को लेकर उठ रहे सवालों पर कंपनी प्रबंधन और एसीसी दशहरा कमेटी को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। क्या इस बार आयोजन की व्यवस्था में कोई बदलाव किया गया है? क्या किसी युवा नेता को कंपनी की ओर से प्रायोजन दिया जा रहा है? यदि हां, तो उसका आधार और स्वरूप क्या है?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या एसीसी कैमोर का दशहरा अपनी पुरानी गैर-राजनीतिक पहचान के साथ आगे बढ़ेगा, या इस बार त्योहार की आड़ में सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश होगी?
कैमोर की जनता को उम्मीद है कि कंपनी प्रबंधन वर्षों की परंपरा, सामाजिक सौहार्द और अपनी संस्थागत प्रतिष्ठा को सर्वोपरि रखेगा। क्योंकि दशहरा किसी एक दल या व्यक्ति का नहीं, पूरे समाज का पर्व है।


