लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी ने उठाए सवाल, सभी पात्र संतानों और वास्तविक निवासियों को मालिकाना हक देने की मांग
कटनी। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आबादी भूमि पर वर्षों से निवास कर रहे परिवारों को मालिकाना हक देने और भूमि का पंजीयन कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सरकार की इस पहल को जहां आम लोगों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं सर्वे और पंजीयन की प्रक्रिया में सामने आ रही कथित विसंगतियों ने कई परिवारों के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी मुद्दे को लेकर लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष बिंदेश्वरी पटेल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आबादी भूमि के सर्वे एवं पंजीयन में सुधार की मांग की है।
बिंदेश्वरी पटेल का कहना है कि कई ऐसे परिवार हैं, जिनके मुखिया के नाम पर वर्षों से आबादी भूमि में मकान और निवास रहा है। समय के साथ परिवार की संतानों ने भी उसी भूमि पर अपने परिवारों के साथ अलग-अलग आवासीय व्यवस्था बना ली है। लेकिन सर्वे के दौरान कहीं केवल एक संतान का नाम दर्ज कर उसी के नाम पर रजिस्ट्री किए जाने की स्थिति सामने आ रही है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि एक ही परिवार की तीन संतानें वर्षों से उस भूमि पर निवास कर रही हैं और पंजीयन केवल एक संतान के नाम होता है, तो बाकी दो संतानों के आवासीय अधिकारों का क्या होगा? क्या उन्हें अपने ही पुश्तैनी निवास में अधिकारों से वंचित होना पड़ेगा?
सरकार की अच्छी पहल कहीं पारिवारिक विवाद की वजह न बन जाए!
पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आबादी भूमि के सर्वे में केवल एक व्यक्ति के नाम को आधार बनाने के बजाय परिवार की वास्तविक स्थिति, वर्षों से चले आ रहे कब्जे, उत्तराधिकार और सभी पात्र निवासियों के अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो एक ही परिवार के सदस्यों के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है।
लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी की प्रमुख मांगें
लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि—
आबादी भूमि के सर्वे में सभी पात्र संतानों और वास्तविक निवासियों के नाम दर्ज किए जाएं।
किसी एक संतान के नाम पंजीयन से पहले अन्य पात्र संतानों के आवासीय एवं उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों का निराकरण किया जाए।
आवश्यकतानुसार सभी पात्र हितग्राहियों का संयुक्त पंजीयन अथवा नियमानुसार अलग-अलग आवासीय अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।
किसी भी पात्र संतान को बिना सुनवाई और उचित समाधान के उसके आवासीय अधिकार से वंचित न किया जाए।
सर्वे और पंजीयन की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए तथा शिकायतों के निराकरण की प्रभावी व्यवस्था हो।
रजिस्ट्री के साथ न्यायपूर्ण अधिकार भी जरूरी
बिंदेश्वरी पटेल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आबादी भूमि की रजिस्ट्री कराना नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रत्येक पात्र परिवार और उसके सदस्यों को न्यायपूर्ण आवासीय अधिकार दिलाना भी होना चाहिए। सरकार को अभियान की विसंगतियों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि किसी परिवार की एक संतान को अधिकार मिले और दूसरी संतानें अपने ही घर में अधिकारों के लिए भटकने को मजबूर न हों।


