जबलपुर। रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने आर्थिक अपराध ब्यूरो द्वारा एफआईआर निरस्त करने के आदेश दिए हैँ।
ईओडब्ल्यू ने राजेश शर्मा के खिलाफ आइसीआइसीआइ बैंक में खाता खोलकर फर्जीवाड़ा करने का मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 सी और 66 डी के अंतर्गत दर्ज किया था। ब्यूरो का कहना था कि इसमें कई बैंककर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली। अंगूठा किसी का और अन्य डिटेल किसी और की होने पर बैंककर्मियों ने आपत्ति दर्ज क्यों नहीं कराई। बैंक अकाउंट से 12 दिन में 1.36 करोड़ से ज्यादा राशि राजेश शर्मा ने अपने करीबी के खाते में ट्रांसफर करवा दी।
न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा कि पीठ ने दिए आदेश में कहा है कि एक निजी सिविल विवाद में पक्षपात करने के अप्रत्यक्ष उद्देश्य से दर्ज की गई। अतः, उपरोक्त मामलों में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णयों के आलोक में, यह न्यायालय न्याय की त्रुटि को रोकने और न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता को बनाए रखने के लिए प्राथमिकी को रद्द करने हेतु अपने अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करना उचित समझता है।
तदनुसार, याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध 09.06.2025 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 सी और 66 डी के अंतर्गत पुलिस स्टेशन आर्थिक अपराध शाखा, भोपाल में अपराध संख्या 98/2025 के तहत पंजीकृत आपराधिक मामला, जो विधि प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाता है, एतद्द्वारा रद्द किया जाता है। पक्षकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय सहित विभिन्न मंचों के समक्ष अपने सिविल मुकदमे लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं।उपर्युक्त के साथ, रिट याचिका स्वीकृत एवं निस्तारित की जाती है। कॉस्ट के संबंध में कोई आदेश नहीं।