कटनी/बड़वारा। बड़वारा ग्राम में शासन की आवासीय पट्टा वितरण योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कर अपात्र लोगों को पट्टे आवंटित किए गए। जय सूर्यवंशी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई लोगों ने कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लेकर शासन की भूमि पर कब्जा किया। ज्ञापन के अनुसार कुछ महिलाओं ने पति के जीवित होने के बावजूद खुद को विधवा दर्शाते हुए कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर पट्टे प्राप्त किए। ग्रामीणों ने ऐसे सभी मामलों की दस्तावेजी जांच कराने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि भूमिहीन और गरीब परिवारों के लिए बनाई गई योजना का लाभ रसूखदार लोगों ने उठा लिया। आरोप है कि जिन लोगों के पास पहले से पक्के मकान और पर्याप्त भूमि है, उन्हें भी पट्टे आवंटित कर दिए गए। इसके अलावा कई खसरा नंबरों पर अवैध निर्माण और बेनामी कब्जे होने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर पट्टा किसी और के नाम है, जबकि निर्माण कोई और व्यक्ति कर रहा है।
ज्ञापन में खसरा क्रमांक 39, 25, 197, 46, 429, 127, 485, 436/1, 425, 63, 486/1, 453, 466/1, 458/1, 132, 426/1, 446, 427/1, 432 सहित अन्य भूमि की भौतिक एवं अभिलेखीय जांच कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने हल्का पटवारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गरीबों के कच्चे मकानों पर कार्रवाई की जाती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के अवैध निर्माणों पर प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
सभी विवादित खसरा नंबरों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता (या लागू विधि) के अनुसार धोखाधड़ी एवं कूटरचना से संबंधित प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।
अपात्र हितग्राहियों के पट्टे निरस्त कर सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई जाए।
प्रशासन पर लगाए गए भेदभाव के आरोपों की भी जांच की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।




