कटनी। जिन माफियाओं पर खनिज विभाग को कार्रवाई करना चाहिए अब वही माफिया खनिज अधिकारी की चौखट चूम रहे हैं.? पूरे जिले में गौड़ खनिज से लेकर बंद खदानों से नदी की छाती छलनी कर बेशकीमती रेत का अवैध उत्खनन कर भारी भरकम वाहनों से परिवहन कर करोड़ों की लागत से बनाई गई सड़कों को बदसूरत किया जा रहा है, बावजूद खनिज विभाग कार्रवाई करने की जगह माफियाओं के साथ चोली दामन की भूमिका निभाने में लगा हुआ है.? जिसकी वजह से जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का कारोबार लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिस काम के लिए खनिज विभाग बनाया गया है, उसी काम में अब पुलिस विभाग अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है।
ताजा मामला बीते सोमवार को बड़वारा थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने एक ही दिन में तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली अवैध रेत परिवहन करते हुए पकड़े और जब्त किए। कार्रवाई के दौरान वाहन चालक रेत परिवहन के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद तीनों वाहनों को जब्त कर थाना परिसर में खड़ा कराया गया और वैधानिक कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान ग्राम रोहनिया में एक लाल रंग का महिंद्रा ट्रैक्टर एवं ट्रॉली में अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाया गया। वाहन चालक ने अपना नाम सागर कोल पिता कमलेश कोल, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम रोहनिया थाना बड़वारा बताया।
इसी कड़ी में ग्राम परसेल में एक आयशर ट्रैक्टर-ट्रॉली में अवैध रेत परिवहन करते पाए जाने पर चालक आजाद रौतेल पिता राजेश रौतेल, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम परसेल थाना बड़वारा से पूछताछ की गई।
वहीं ग्राम विलायतकलां मेन रोड पर एक महिंद्रा ट्रैक्टर-ट्रॉली में अवैध रेत परिवहन करते पाए जाने पर चालक सिपाही केवट पिता कौशल केवट, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम विलायतकलां थाना बड़वारा से पूछताछ की गई।
तीनों वाहन चालकों से रेत परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, किंतु वे कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। जिसके बाद पुलिस द्वारा तीनों ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर थाना परिसर में सुरक्षार्थ खड़ा कराया गया तथा उनके विरुद्ध धारा 106 बीएनएसएस के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ग्राम निगहरा मोड़, रोहनिया, परसेल और विलायतकलां जैसे क्षेत्रों में अवैध रेत परिवहन खुलेआम हो रहा था, तो खनिज विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? और यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जिले में अक्सर देखने को मिलता है कि अवैध खनिज परिवहन के मामलों में पुलिस कार्रवाई करती है, जबकि खनिज विभाग की मौजूदगी केवल कागजों तक सीमित नजर आती है। ऐसे में आमजन यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब अवैध उत्खनन और परिवहन पर शिकंजा कसने का काम पुलिस ही कर रही है, तो फिर खनिज विभाग की उपयोगिता और जवाबदेही क्या है?
खनिज विभाग पर यह भी आरोप लगते रहे हैं कि नियमित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई के अभाव में खनिज माफियाओं के हौसले बुलंद होते हैं। अब बड़वारा पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।
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| रवि कुमार गुप्ता, संपादक ( जन आवाज ) |



