कटनी। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के विरोध में कांग्रेस ने जिले भर में उपवास कर लोकतंत्र बचाने का संदेश दिया। लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नामांकन निरस्त होने की नौबत आई ही क्यों?
कांग्रेस नेताओं ने उपवास के दौरान इसे लोकतंत्र पर हमला और विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश बताया, लेकिन विरोध के बीच यह चर्चा भी तेज रही कि यदि नामांकन प्रक्रिया में कोई तकनीकी या कानूनी कमी नहीं थी तो निर्वाचन प्रक्रिया में नामांकन खारिज कैसे हुआ।
जिला एवं ब्लॉक मुख्यालयों पर आयोजित उपवास कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की बात कही। हालांकि विपक्ष के इस आंदोलन पर सत्तापक्ष समर्थकों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के तहत लिए गए निर्णय को राजनीतिक रंग देकर कांग्रेस सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर उपवास करने से पहले कांग्रेस को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि नामांकन निरस्त होने के वास्तविक कारण क्या थे। यदि कोई त्रुटि हुई थी तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
फिलहाल कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतंत्र और संविधान से जोड़कर जनसमर्थन जुटाने में लगी है, जबकि विरोधी इसे अपनी राजनीतिक विफलता छिपाने का प्रयास बता रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का यह विवाद आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में और गरमा सकता है।


