कटनी। जिले में ना जाने कितने पुलिस कप्तान आए और चले गए। लेकिन वर्तमान पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा जिस तरह से पूरी शिद्दत और ईमानदारी के साथ काम करने के लिए जाने जाते हैं, तो वहीं कोतवाली पुलिस उनकी ईमानदारी पर सवालिया निशान और उनकी साख पर बट्टा लगाने में लगी हुई है? इतना ही नहीं पुलिस कप्तान के द्वारा अवैध शराब ऑपरेशन शिकंजा के तहत चलाया जा रहा अभियान को पूरी तरह ध्वस्त करने में लगी हुई है।
जुटाई गई जानकारी के मुताबिक कोतवाली से चंद कदमों की दूरी में बनी फूल और सब्जी मंडी अब पियक्कड़ों का महफूज अड्डा बन चुकी है। सबसे बड़ी बात ये है कि कई बार इसी अड्डे में खड़े होकर कोतवाली प्रभारी अपने लाव लश्कर के साथ घेरा बंदी कर शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर धारा 185 की कार्रवाई करती नजर आई हैं। लेकिन सार्वजनिक रूप से सुरक्षित अड्डा बना चुके दारुखोरों पर पुलिस की नजरे इनायत नहीं हुई आखिर क्यों? तो चलिए हम आपको बताते हैं।
दरअसल फूल और सब्जी मंडी के सामने ही शराब दुकान के बाहर ही जाम से जाम टकराए जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थान पर सुरा प्रेमियों पर यदि पुलिस कार्रवाई करेगी तो शराब ठेकेदार नाराज हो सकता है। इसलिए पुलिस ये जोखिम और होने वाले नुकसान को उठाने के मूड में फिलहाल नजर नहीं आ रही? भले ही खतरा आम जनता के सिर पर मंडराता रहे पुलिस की बला से।
आपको बता दें कि मुड़वारा सब्जी मंडी क्षेत्र में स्थित शराब दुकान के बाहर खुलेआम शराबखोरी का सिलसिला लगातार जारी है। दुकान से शराब खरीदने वाले लोग आसपास की सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर बैठकर शराब पीते नजर आते हैं, लेकिन जिम्मेदार पुलिस और आबकारी विभाग कार्रवाई करता दिखाई नहीं दे रहा। चिंता की बात यह है कि शराब दुकान के सामने ही फूल मंडी संचालित होती है और इसी मार्ग पर चौपाटी क्षेत्र भी है। जहां पहले नशे से जुड़े विवाद में हत्या जैसी गंभीर वारदात हो चुकी है। इसके बावजूद खुलेआम शराबखोरी रोकने पर कोतवाली पुलिस नकारा साबित हो रही है। जबकि कोतवाली से शराबियों के अड्डे की दूरी महज चंद कदमों की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही क्षेत्र में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है। सब्जी, फूल मंडी और चौपाटी जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों का आना-जाना रहता है। लेकिन नशे में धुत लोगों की मौजूदगी से असुरक्षा का माहौल हमेशा बना रहता है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब इस क्षेत्र का इतिहास नशे से जुड़े विवादों और गंभीर अपराधों का गवाह रहा है तब पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी इतनी कमजोर क्यों है? क्या किसी नई अप्रिय घटना के बाद ही कार्रवाई होगी? सबसे बड़ी बात ये है कि जिस रास्ते पर नशे के कारण खून बह चुका हो वहां आज भी खुलेआम जाम छलक रहे हैं। सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग कानून का पालन करवा रहा है, या सिर्फ अगली वारदात का इंतजार कर रहा है।
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| रवि कुमार गुप्ता, संपादक ( जन आवाज ) |





