कटनी। जिले के कैमोर स्थित ACC प्लांट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला कंपनी के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से कराए गए विकास कार्यों का है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि CSR के नाम पर लाखों रुपये के कार्य कुछ चुनिंदा लोगों को दिलाए गए और कई काम अधूरे या निम्न गुणवत्ता के होने के बावजूद पूरा भुगतान कर दिया गया।
आरोप यह भी हैं कि कुछ कथित दलबदलू और दलाल प्रवृत्ति के लोगों को प्लांट में वेंडर बनाकर विभिन्न कार्यों के ठेके दिए गए। यदि ये आरोप सही हैं, तो सवाल उठता है कि इन लोगों को वेंडर किसने बनाया और किन अधिकारियों की अनुशंसा पर उन्हें काम आवंटित किया गया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई विकास कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं, जबकि संबंधित ठेकेदारों को पूरी राशि का भुगतान किए जाने की चर्चा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या कार्यों का भौतिक सत्यापन हुआ था? क्या गुणवत्ता परीक्षण कराया गया था? और क्या भुगतान तय नियमों के अनुसार किया गया?
इसी बीच एक व्यक्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि उसने अपने पूर्व मालिक के निधन के बाद उनके परिवार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया और बाद में राजनीतिक संरक्षण बदलकर अपना प्रभाव बनाए रखा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन लोगों ने वर्षों तक संगठन और क्षेत्र के लिए काम किया, वे आज भी रोजगार की तलाश में हैं, जबकि कथित बिचौलिए और प्रभावशाली लोग CSR योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इससे पूरे CSR तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब क्षेत्र में मांग उठ रही है कि ACC प्रबंधन इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराए, सभी CSR कार्यों का सामाजिक एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए, भुगतान और कार्यों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
(नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि शेष है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)


