रिटेल व्यापारियों के आरोपों से कृषि विभाग में हलचल, गुप्ता ट्रेडिंग कंपनी समेत बड़े होलसेल डीलरों के स्टॉक और आवंटन की होगी जांच।
कटनी। जिले में यूरिया खाद वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल अब प्रशासनिक कार्रवाई का कारण बन गए हैं। छोटे रिटेल खाद व्यापारियों द्वारा उप संचालक कृषि (DDA) को सौंपे गए शिकायत पत्र ने कृषि विभाग को जांच के लिए मजबूर कर दिया है। आरोप हैं कि किसानों तक समय पर खाद नहीं पहुंचने के पीछे केवल कमी नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था में कथित गड़बड़ियां भी जिम्मेदार हैं।
शिकायत के बाद कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिले के प्रमुख होलसेल खाद विक्रेताओं के स्टॉक, वितरण और आवंटन की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर गोदामों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।
रिटेल व्यापारियों ने खोली व्यवस्था की परतें
ज्ञापन में दावा किया गया है कि छोटे व्यापारियों को अक्सर "यूरिया खत्म है" कहकर लौटा दिया जाता है, जबकि बड़े व्यापारियों को आसानी से खाद उपलब्ध हो जाती है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह व्यवस्था लंबे समय से छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचा रही है।
ज्ञापन में गुप्ता ट्रेडिंग कंपनी, सनत ट्रेडर्स और श्री राम बीज भंडार सहित कुछ प्रमुख होलसेल व्यापारियों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि स्टॉक और आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही।
'स्टॉक नहीं' या 'स्टॉक छिपाने' का खेल?
रिटेल व्यापारियों का आरोप है कि कई बार उन्हें खाद उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर वापस भेज दिया गया, लेकिन बाद में जानकारी मिली कि संबंधित गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद था। व्यापारियों ने मांग की है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान कराया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
टैगिंग के नाम पर अतिरिक्त खरीद का आरोप
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यूरिया देने के बदले अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जाता है। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि 70 बोरी यूरिया लेने पर ₹10,000 का बेंटोनाइट सल्फर खरीदने की शर्त रखी गई।
छोटे व्यापारियों का दर्द
व्यापारियों का कहना है कि सरकारी दर पर खाद बेचने के बावजूद परिवहन और हमाली का खर्च उन्हें अलग से उठाना पड़ता है। उनका दावा है कि प्रति बोरी ₹30 से ₹40 तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे छोटे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
अब DDA की जांच पर टिकी निगाहें
शिकायत के बाद उप संचालक कृषि (DDA) ने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर, आवंटन रिकॉर्ड और गोदामों में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का मिलान किया जाएगा। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित डीलरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अब जिले के व्यापारियों और किसानों की निगाह इस जांच पर टिकी है। सभी को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय होगी।
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| रवि कुमार गुप्ता, संपादक |



