कटनी। महिला एवं बाल विकास विभाग, कटनी में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 आशाराम राजपूत के खिलाफ फर्जी हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर अनुचित लाभ लेने के मामले में विभागीय जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। कलेक्टर आशीष तिवारी ने श्री राजपूत को सहायक ग्रेड-3 के पद से चतुर्थ श्रेणी भृत्य के पद पर प्रत्यावर्तित (पदावनत) कर दिया है। उनकी नई पदस्थापना कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना ढीमरखेड़ा में की गई है।
2006 में भृत्य से बने थे सहायक ग्रेड-3
जानकारी के अनुसार आशाराम राजपूत की वर्ष 2006 में भृत्य पद से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति हुई थी। इसके बाद वर्ष 2019 में प्रथम समयमान वेतनमान दिए जाने के दौरान उनकी सेवा पुस्तिका में हिन्दी मुद्रलेखन परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण-पत्र दर्ज नहीं मिला।
इस पर जिला पेंशन कार्यालय द्वारा आपत्ति दर्ज की गई थी। विभाग की ओर से प्रमाण-पत्र के संबंध में जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
नवंबर 2020 में प्रस्तुत किया हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र
विभाग के निर्देश के बाद आशाराम राजपूत ने नवंबर 2020 में हिन्दी मुद्रलेखन परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया। प्रमाण-पत्र की सत्यता की जांच के लिए इसे शीघ्रलेखन एवं मुद्रलेखन परीक्षा परिषद, भोपाल भेजा गया।
जांच के दौरान प्रस्तुत प्रमाण-पत्र का उपलब्ध परीक्षाफल एवं संबंधित अभिलेखों से मिलान नहीं पाया गया। इसके बाद मामले में विभागीय जांच की गई।
विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित
विभागीय जांच में फर्जी हिन्दी मुद्रलेखन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर अनुचित लाभ लेने और कार्यालय को गुमराह करने का आरोप प्रमाणित हुआ।
जांच के निष्कर्षों के आधार पर मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर आशीष तिवारी ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-10 के तहत दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए।
सहायक ग्रेड-3 से बने चतुर्थ श्रेणी भृत्य
कलेक्टर के आदेश के बाद आशाराम राजपूत को सहायक ग्रेड-3 के पद से चतुर्थ श्रेणी भृत्य के पद पर पदावनत कर दिया गया है। साथ ही उनकी पदस्थापना कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना ढीमरखेड़ा में की गई है।
इतना ही नहीं, वर्ष 2019 में प्रदाय किया गया प्रथम समयमान वेतनमान का आदेश भी निरस्त कर दिया गया है।
कार्रवाई से स्पष्ट संदेश
फर्जी दस्तावेज के माध्यम से शासकीय सेवा में अनुचित लाभ लेने के मामले में हुई इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि सरकारी सेवा में दस्तावेजों की सत्यता और अभिलेखों की जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध पदावनति और समयमान वेतनमान निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई की गई है।
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| रवि कुमार गुप्ता, संपादक ( जन आवाज ) |



