संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों पर एक्सेस माइनिंग का आरोप, कांग्रेस विधायक ने मुख्यमंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों को लिखा पत्र।
कटनी/भोपाल। जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील में संचालित खनन कंपनियों पर कथित एक्सेस माइनिंग के मामले में राजनीति फिर गर्मा गई है। कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों से 443 करोड़ रुपये की कथित देय राशि की वसूली तत्काल शुरू करने की मांग की है।
विधायक अलावा ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि सिहोरा क्षेत्र में संचालित मेसर्स आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, मेसर्स निर्मला मिनरल्स और मेसर्स पैसिफिक एक्सपोर्ट द्वारा स्वीकृत सीमा से अधिक आयरन ओर उत्खनन किए जाने की जांच में लगभग 443 करोड़ रुपये की शासकीय वसूली देय पाई गई थी।
विधानसभा में हो चुका है उल्लेख
अलावा ने पत्र में उल्लेख किया है कि इस मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित द्वारा की गई थी। जांच प्रतिवेदन 6 जून 2025 को शासन को सौंपा गया था। इसके बाद 5 अगस्त 2025 को विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस देयता का उल्लेख किया था।
"अब तक क्यों नहीं हुई वसूली?"
कांग्रेस विधायक का आरोप है कि विधानसभा में मामला स्वीकार किए जाने के बावजूद अब तक संबंधित कंपनियों के खिलाफ प्रभावी वसूली प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। न तो डिमांड नोटिस जारी किए गए और न ही राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (RRC) की कार्रवाई प्रारंभ की गई है। साथ ही जीएसटी, ब्याज, दंडात्मक ब्याज और अन्य वैधानिक देयताओं का निर्धारण भी लंबित बताया गया है।
CBI या SIT जांच की मांग
हीरालाल अलावा ने पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे CBI या SIT से कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि कथित अवैध उत्खनन से जुड़े अधिकारियों, सहयोगियों और संरक्षण देने वाले व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही पर्यावरणीय क्षति का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर अलग से क्षतिपूर्ति तय की जाए।
राजनीतिक सवाल
कांग्रेस विधायक के इस पत्र ने एक बार फिर उस सवाल को हवा दे दी है कि जब सरकार स्वयं विधानसभा में 443 करोड़ रुपये की देयता स्वीकार कर चुकी है, तो फिर वसूली की कार्रवाई अब तक क्यों शुरू नहीं हुई। आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।



