विजयराघवगढ़ (कटनी)। ग्राम अमुवारी में अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) समुदाय की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में है। RTI एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता कन्हैया लाल शर्मा ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा मध्य प्रदेश शासन को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम अमुवारी के खसरा क्रमांक 244, 295, 297 एवं 298 राजस्व अभिलेखों में आदिवासी भू-स्वामियों के नाम दर्ज हैं। आरोप है कि इन भूमि पर प्रभावशाली लोगों द्वारा मकान, बाउंड्रीवाल और अन्य स्थायी निर्माण कर कब्जा किया गया है। उनका कहना है कि संबंधित दस्तावेज, राजस्व अभिलेख और स्थलीय तस्वीरों के साथ शिकायत जिला प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय तक भेजी गई थी।
कन्हैया लाल शर्मा का दावा है कि जनजातीय कार्य मंत्रालय ने मध्य प्रदेश शासन को मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक न तो सीमांकन कराया गया और न ही कब्जों की जांच या जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई सामने आई है।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित खसरों का संयुक्त सीमांकन कराया जाए, राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि स्वामित्व एवं कब्जों का सत्यापन किया जाए, अनियमितता मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पूरे विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी भूमि हस्तांतरण और कब्जों की विशेष जांच कराई जाए। साथ ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई शुरू नहीं होती है तो प्रभावित ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों के साथ लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा। साथ ही, मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।


