कटनी। जन आवाज न्यूज। कटनी में करोड़ों रुपये की सरकारी राजस्व हानि से जुड़े बहुचर्चित भूमि प्रकरण में कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने बड़ा फैसला सुनाते हुए विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी यश लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध स्टाम्प शुल्क चोरी के मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। सामाजिक कार्यकर्ता नाजिम खान की शिकायत पर शुरू हुई जांच के बाद न्यायालय ने अलग-अलग विक्रय पत्रों में स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क की कमी पाए जाने पर करीब ₹2.21 करोड़ की रिकवरी के आदेश पारित किए हैं। आदेश 29 जून 2026 को पारित किया गया।
क्या है पूरा मामला?
मामला कटनी के महाराणा प्रताप वार्ड (झिंझरी) स्थित खसरा नंबर 292/1, 292/2, 292/3, 292/5 एवं 292/6 की भूमि से जुड़ा है। न्यायालय के आदेशों के अनुसार यह भूमि वर्ष 2000 में अलग-अलग व्यक्तियों ने उस समय खरीदी थी, जब दस्तावेजों में भूमि को मुख्य सड़क (एनएच-7/वर्तमान बिलहरी रोड) से अंदर स्थित दर्शाया गया था। बाद में 12 मार्च 2018 तथा 16 सितंबर 2019 को यही भूमि अलग-अलग विक्रय पत्रों के माध्यम से यश लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड को बेची गई।
यहीं से शुरू हुआ पूरा विवाद
नाज़िम खान ने शिकायत में आरोप लगाया कि वर्ष 2018 और 2019 की रजिस्ट्रियों में जानबूझकर भूमि की चौहद्दी बदल दी गई। पुराने दस्तावेजों में जहां भूमि सड़क से अंदर बताई गई थी, वहीं नए दस्तावेजों में ऐसी चौहद्दी अंकित की गई जिससे वास्तविक स्थिति छिप गई।
जांच के दौरान संयुक्त उप पंजीयक द्वारा मौके का निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण में पाया गया कि मौके पर मुख्य सड़क (एनएच-7) से सीधे नाले तक डामर सड़क बनी हुई है तथा सड़क से लगी भूमि का व्यावसायिक महत्व कहीं अधिक है। इसी आधार पर बाजार मूल्य का पुनर्मूल्यांकन किया गया।
वर्ष 2000 और 2018-19 के दस्तावेजों में बड़ा अंतर
आदेशों में दर्ज है कि—
वर्ष 2000 के मूल विक्रय पत्रों में भूमि की चौहद्दी अलग थी।
12 मार्च 2018 एवं 16 सितंबर 2019 की रजिस्ट्रियों में चौहद्दी बदलकर दर्ज की गई।
इससे भूमि का बाजार मूल्य कम दर्शाया गया।
परिणामस्वरूप शासन को स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क में भारी नुकसान हुआ।
पांच अलग-अलग विक्रय पत्रों की हुई जांच
न्यायालय ने प्रत्येक विक्रय पत्र की अलग-अलग जांच की।
इनमें प्रमुख रूप से—
दस्तावेज क्रमांक MP208052018A1156337 (12.03.2018)
दस्तावेज क्रमांक MP208052018A1156510 (12.03.2018)
दस्तावेज क्रमांक MP208052019A1646284 (16.09.2019)
सहित अन्य विक्रय पत्रों की जांच कर बाजार मूल्य पुनः निर्धारित किया गया।
किस प्रकार निकाली गई स्टाम्प ड्यूटी चोरी?
जांच में पाया गया कि भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य रजिस्ट्री में दर्शाए गए मूल्य से कई गुना अधिक था।
उदाहरण के तौर पर एक प्रकरण में—
बाजार मूल्य लगभग ₹2.95 करोड़ निर्धारित किया गया।
जबकि विक्रय मूल्य मात्र ₹40 लाख दर्शाया गया।
परिणामस्वरूप ₹24.24 लाख से अधिक स्टाम्प शुल्क की कमी पाई गई।
दूसरे प्रकरण में—
बाजार मूल्य लगभग ₹2.75 करोड़ निर्धारित हुआ।
स्टाम्प शुल्क की कमी ₹22.39 लाख से अधिक पाई गई।
एक अन्य प्रकरण में—
बाजार मूल्य ₹1.67 करोड़ निर्धारित किया गया।
वहां दस्तावेज को पर्याप्त मुद्रांकित माना गया क्योंकि उस प्रकरण में स्टाम्प शुल्क देयता पूरी पाई गई।
इसी प्रकार सभी प्रकरणों का पृथक परीक्षण कर कुल मिलाकर करीब ₹2.21 करोड़ की रिकवरी निर्धारित की गई।
सुनवाई में क्या हुआ?
आदेश के अनुसार—
विक्रेताओं एवं क्रेता कंपनी को कई बार नोटिस जारी किए गए।
28 जनवरी, 10 फरवरी, 25 फरवरी, 29 मई एवं 25 जून 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई।
विक्रेताओं ने नोटिस प्राप्त करने के बावजूद जवाब प्रस्तुत नहीं किया।
कई मामलों में क्रेता पक्ष द्वारा स्पीड पोस्ट लेने से इंकार किए जाने का उल्लेख भी आदेश में दर्ज है।
इसके बाद न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों एवं स्थल निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई की।
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए थे?
शिकायतकर्ता नाज़िम खान ने आरोप लगाया था कि—
विक्रय पत्रों में जानबूझकर चौहद्दी बदली गई।
वास्तविक बाजार मूल्य छिपाया गया।
शासन को करोड़ों रुपये के स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क की हानि पहुंचाई गई।
संबंधित लोगों ने इससे आर्थिक लाभ प्राप्त किया।
कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने क्या कहा?
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि—
स्थल निरीक्षण रिपोर्ट विश्वसनीय है।
भूमि का पुनर्मूल्यांकन मध्यप्रदेश बाजार मूल्य निर्धारण नियमों के अनुसार किया गया।
जहां स्टाम्प शुल्क की कमी पाई गई वहां भारतीय स्टाम्प अधिनियम के तहत कमी, दंड और ब्याज की वसूली की जाएगी।
भविष्य में यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो उनकी जिम्मेदारी क्रेता एवं विक्रेता की होगी।
अब आगे क्या होगा?
कलेक्टर ऑफ स्टाम्प द्वारा पारित आदेशों के बाद संबंधित पक्ष के पास वैधानिक अपील का अधिकार है। यदि सक्षम प्राधिकारी से स्थगन नहीं मिलता है तो शासन निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिकवरी की कार्रवाई आगे बढ़ा सकता है।
जन आवाज न्यूज विश्लेषण
यह मामला केवल स्टाम्प ड्यूटी का नहीं है, बल्कि यह इस सवाल को भी सामने लाता है कि क्या वर्ष 2000 में खरीदी गई सड़क से अंदर की भूमि को 2018-19 की रजिस्ट्रियों में अलग चौहद्दी दिखाकर उसके वास्तविक बाजार मूल्य को प्रभावित किया गया?
कलेक्टर ऑफ स्टाम्प का आदेश इस प्रश्न पर प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित पक्ष द्वारा दायर की जाने वाली अपील और उसके परिणाम पर निर्भर करेगी।


